गर्मियों में त्वचा को मुलायम रखने के आयुर्वेदिक आधार

गर्मियों में त्वचा को मुलायम रखने के आयुर्वेदिक आधार

ग्रीष्म ऋतु अपने साथ तेज धूप, गर्म हवाएँ और पसीना लेकर आती है, जिससे हमारी त्वचा रूखी और बेजान बन जाती है। ऐसे में आवश्यक है कि हम त्वचा को मुलायम बनाए रखने के लिए कई तरह के घरेलू नुस्खों के विषय में चर्चा करें। आधुनिक विज्ञान हो या घरेलू नुस्खें इन सभी उपायों की जड़ें प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ चरक संहिता में मिलती हैं।

आयुर्वेद के अनुसार हर ऋतु का प्रभाव हमारे शरीर और त्वचा पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक ऋतु में त्वचा की देखभाल ऋतुओं के हिसाब से करना आवश्यक हो जाता है। चरक संहिता के सूत्रस्थान, अध्याय 6 ऋतुचर्या में स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है कि ग्रीष्म ऋतु में शरीर में रूक्षता (शुष्कता) बढ़ जाती है। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए शीतल (ठंडक देने वाले) और स्निग्ध (नमी देने वाले) पदार्थों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। आधुनिक युग में भी यही सिद्धांत त्वचा की देखभाल का आधार है।

आयुर्वेदिक ग्रंथों में त्वचा की सुंदरता को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए 200 से अधिक औषधीय जड़ी‑बूटियों का उल्लेख किया गया है।(1) 

हमारे ग्रंथों में वर्णित आयुर्वेदिक विचार को जब हम आधुनिक घरेलू नुस्खों से जोड़कर देखते हैं, तो एक स्पष्ट समानता दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करता है, खीरा शरीर और त्वचा को हाइड्रेट करता है। ठीक इसी तरह दूध व शहद त्वचा को पोषण देकर उसे मुलायम करते हैं। ये सभी पदार्थ उसी “शीतल” और “स्निग्ध” गुण के अंतर्गत आते हैं, जिनका वर्णन महर्षि चरक ने हजारों वर्षों पूर्व अपनी पुस्तक चरक संहिता में किया है।

यही नहीं, हमारे आयुर्वेद में “लेप” (फेस पैक) और “उद्वर्तन” (उबटन) का भी विष्तृत उल्लेख मिलता है, जिनका उद्देश्य त्वचा की सफाई और कोमलता बनाए रखना है। आज जो हम दही और बेसन जैसे घरेलू फेस पैक का उपयोग करते हैं, वह इसी परंपरा का आधुनिक रूप हैं, जो त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाकर त्वचा में निखार लाते हैं।

हाल की वैज्ञानिक रिसर्च Curcumin and Aloe Vera Clinical Trial Study और Natural Herbal Treatments for Acne  में यह पाया गया है कि एलोवेरा, हल्दी और अन्य आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ त्वचा के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण रखती हैं, जो त्वचा को मुलायम और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हैं।  

यह स्पष्ट है कि गर्मियों में त्वचा की देखभाल के लिए अपनाए जाने वाले घरेलू उपाय कोई नई खोज नहीं हैं, बल्कि वे प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित हैं।(2)

हजारों वर्ष पूर्व महर्षि चरक के द्वारा दिए गए सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने पहले थे।

चरक संहिता में बताए गए उपायों को विस्तृत रूप से समझना अत्यंत उपयोगी है। आयुर्वेद के अनुसार त्वचा की देखभाल केवल बाहरी उपायों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवनचर्या, आहार और स्वच्छता से भी गहराई से जुड़ी होती है। 

अभ्यंग (तेल मालिश):
इसके लिए 1–2 चम्मच नारियल तेल लेकर उसे हल्का गुनगुना कर लें और पूरे शरीर या चेहरे पर 10–15 मिनट तक हल्के हाथों से मालिश करें। इसके बाद 15–20 मिनट छोड़कर स्नान कर लें। यह प्रक्रिया त्वचा को गहराई से पोषण देती है और उसे मुलायम बनाए रखती है।

  1.  Vitamin C Gel:
    त्वचा की कसावट और पोषण बनाए रखने के लिए Vitamin C Face Lifting Gel का उपयोग भी किया जा सकता है। आयुर्वेद में वर्णित “रस” और “ओज” को बढ़ाने वाले गुण आधुनिक विज्ञान में एंटीऑक्सीडेंट्स के रूप में देखे जाते हैं, और विटामिन C इसी श्रेणी में आता है, जो त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बनाता है। 

  2. हर्बल क्लिंज़र:
    दिन में कम से कम एक या दो बार ठंडे या सामान्य पानी से स्नान करना चाहिए। स्नान के दौरान माइल्ड साबुन या हर्बल क्लिंज़र का उपयोग करें और स्नान के बाद त्वचा को जोर से रगड़ने के बजाय हल्के से थपथपाकर सुखाएँ। इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी बनी रहती है और वह ताजगी महसूस करती है।

उबटन (उद्वर्तन):
इसके लिए 2 चम्मच बेसन में एक चुटकी हल्दी और 1–2 चम्मच दही या गुलाब जल मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को चेहरे या शरीर पर लगाकर 10–15 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर हल्के हाथों से रगड़ते हुए धो लें। इससे त्वचा की मृत कोशिकाएँ हटती हैं और त्वचा साफ व मुलायम बनती है।

  1. आयुर्वेद क्रीम:

 Rose Calamine Sun Protective Face Cream (SPF 60) जैसे उत्पाद त्वचा को न केवल सूरज की हानिकारक किरणों से बचाते हैं, बल्कि उसमें मौजूद शीतल तत्व त्वचा को ठंडक भी प्रदान करते हैं।

  1. संतुलित आहार:
    गर्मियों में दिनभर में 8–10 गिलास पानी पीना चाहिए और आहार में खीरा, तरबूज, दही और नारियल पानी जैसे ठंडे व रसयुक्त पदार्थ शामिल करने चाहिए। तले-भुने और अधिक मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। इससे त्वचा अंदर से हाइड्रेट रहती है और उसमें प्राकृतिक चमक बनी रहती है।

  2. शरीर की स्वच्छता:
    दिन में 2–3 बार चेहरे को ठंडे पानी से धोना, बाहर से आने के बाद तुरंत चेहरा साफ करना, पसीने वाले कपड़े बदलना और साफ तौलिया उपयोग करना त्वचा को गंदगी और संक्रमण से बचाता है। इस प्रकार, इन सभी उपायों को नियमित रूप से अपनाकर गर्मियों में भी त्वचा को मुलायम, ताजगीभरी और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

यदि हम हमारे जीवन में आयुर्वेद के इन सरल उपायों जैसे शीतल और स्निग्ध पदार्थों का उपयोग, पर्याप्त जल सेवन और नियमित देखभाल को अपनाएँ, तो हम गर्मियों में भी अपनी त्वचा को मुलायम, स्वस्थ और चमकदार रख सकते हैं।

BIO Ayurveda प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान, विशेषकर चरक संहिता के सिद्धांतों से प्रेरित होकर उत्पाद तैयार करती है। इसका मुख्य उद्देश्य है ऐसे स्किनकेयर और हेल्थ प्रोडक्ट्स बनाना, जिनमें शून्य हानिकारक रसायनों का उपयोग हो और जो पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों पर आधारित हों। यदि आप अपनी त्वचा और शरीर की देखभाल सुरक्षित, प्रभावी और दीर्घकालिक तरीके से करना चाहते हैं, तो BIO Ayurveda के उत्पाद आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि ये न केवल आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हैं बल्कि आयुर्वेद की “शीतल” और “स्निग्ध” जैसी पारंपरिक अवधारणाओं को भी अपनाते हैं।

  1. Datta HS, Mitra SK, Patwardhan B. Wound healing activity of topical application forms based on ayurveda.   https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3136177/

  2. Khemchand Sharma, Namrata Joshi, Chinky Goyal - Critical review of Ayurvedic Varnya herbs and their tyrosinase inhibition effect https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/26600663/

  3. Gathe K, Damle R - Back to Basics: A Review on Skincare by Ayurveda vis a vis Contemporary Science https://jaims.in/jaims/article/view/3176

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